
बुराई और आंतरिक भय पर विजय के लिए
महाकाली अनुष्ठान देवी महाकाली को समर्पित एक शक्तिशाली तांत्रिक साधना है। यह अनुष्ठान गहरे नकारात्मक प्रभावों को नष्ट करने, तांत्रिक बाधाओं से सुरक्षा पाने और जीवन में दिव्य ऊर्जा लाने के लिए किया जाता है।
काले जादू, ऊपरी बाधा, वशीकरण और बुरी नजर से सुरक्षा मिलती है।
कर्म दोष, पितृ दोष और आत्मिक नकारात्मकता को दूर करता है।
आत्मविश्वास, ऊर्जा और चेतन शक्ति को मजबूती मिलती है।
शत्रुओं, भय और आंतरिक संघर्षों का नाश होता है।
आंतरिक शक्ति जाग्रत होती है और साधक को दिव्य सिद्धियाँ प्राप्त होती हैं।
पूजा की शुरुआत पवित्र कलश की स्थापना और संकल्प के साथ होती है, जिससे देवी को आमंत्रण दिया जाता है।
देवी महाकाली को जागृत करने हेतु वैदिक और तांत्रिक मंत्रों का उच्चारण किया जाता है।
: विशेष जाप माला द्वारा देवी महाकाली के 108 या 1008 मंत्रों का सच्चे मन से जाप किया जाता है।
: लाल फूल, काले तिल, गुड़ और नारियल जैसे शुभ सामग्री से देवी को प्रसन्न किया जाता है।
पवित्र अग्नि में विशेष सामग्री समर्पित कर वातावरण को शुद्ध किया जाता है और देवी को बलि अर्पित की जाती है।
पूजा का समापन दिव्य महाआरती के साथ किया जाता है, जो ऊर्जा और आशीर्वाद से भर देती है।
काले वस्त्र चढ़ाने से देवी के प्रति समर्पण और उनकी शक्ति की प्राप्ति का संकेत मिलता है।

बड़े मंगल के दिन भगवान हनुमान को ताजा बेसन या बूंदी के लड्डू चढ़ाना भक्ति का एक पवित्र कार्य है जो दिव्य आशीर्वाद, इच्छाओं की पूर्ति और बुरी शक्तियों से सुरक्षा प्रदान करता है।

काले तिल अर्पित करके शनि देव को प्रसन्न किया जाता है और अशुभ प्रभाव कम होते हैं।
