
मंगल और राहु के अशुभ योग (अंगारक दोष) के प्रभाव को शांत करने हेतु प्रभावशाली वैदिक पूजा।
जब कुंडली में मंगल और राहु एक साथ स्थित होते हैं, तब अंगारक दोष बनता है। यह दोष जीवन में क्रोध, अचानक बाधाएं, आर्थिक अस्थिरता, संबंधों में तनाव और स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न कर सकता है। अंगारक दोष निवारण पूजा एक प्रभावशाली वैदिक अनुष्ठान है, जिसमें मंत्र जाप, हवन और विधिवत संकल्प के माध्यम से मंगल एवं राहु के अशुभ प्रभाव को शांत किया जाता है। यह पूजा ग्रहों के नकारात्मक प्रभाव को कम कर जीवन में संतुलन और सकारात्मकता लाती है। कृपया ध्यान दें: यह पूजा केवल तभी संपन्न की जाएगी जब न्यूनतम 10 बुकिंग प्राप्त हो जाएंगी।
कुंडली में मंगल और राहु के अशुभ योग के प्रभाव को शांत करने में सहायक।
मंगल की उग्र ऊर्जा को संतुलित कर क्रोध, आवेग और झगड़ों को कम करता है।
कोर्ट केस, संपत्ति विवाद एवं अचानक उत्पन्न झगड़ों में राहत प्रदान करता है।
संबंधों में तनाव कम करता है, गलतफहमियों को दूर करता है तथा विवाह में हो रही देरी को कम करता है।
बुकिंग के बाद, चयनित तिथि और समय पर आपकी पूजा संपन्न की जाती है और आपको इसे लाइव देखने की सुविधा प्रदान की जाती है। पूजा के दौरान पंडित जी आपका नाम और गोत्र उच्चारण कर संकल्प लेते हैं, जिससे संपूर्ण विधि-विधान विशेष रूप से आपके लिए संपन्न किया जाता है। आप पूरी पूजा को लाइव अनुभव कर सकते हैं और उसका सीधा आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
पूजा की शुरुआत साधक के नाम से संकल्प लेकर की जाती है। इसके बाद मंगल एवं राहु ग्रह की शांति हेतु वैदिक मंत्रों द्वारा आह्वान किया जाता है, जिससे ग्रह संतुलन की प्रक्रिया प्रारंभ होती है।
अंगारक दोष निवारण के विशेष मंत्रों का जाप किया जाता है, जिसके पश्चात हवन द्वारा ग्रहों के अशुभ प्रभाव को शांत कर सकारात्मक ऊर्जा को सुदृढ़ किया जाता है।
काले कपड़े एक पवित्र चढ़ावा है जिसे धार्मिक अनुष्ठानों और आध्यात्मिक परंपराओं में दान किया जाता है। साधुओं को वस्त्र अर्पित करना सम्मान, सेवा और दान का प्रतीक माना जाता है। यह चढ़ावा साधुओं की दैनिक आवश्यकताओं में सहायता करता है और इसे श्रद्धा व पुण्य का कार्य माना जाता है।
तांबे का लोटा एक पारंपरिक और पवित्र पात्र है जिसका उपयोग कई हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा में किया जाता है। इसका प्रयोग पवित्र जल रखने और अर्पित करने के लिए किया जाता है। साधुओं को तांबे का लोटा अर्पित करना श्रद्धा, पवित्रता और सम्मान का प्रतीक माना जाता है।

काले पुष्प एक पवित्र चढ़ावा माने जाते हैं जिन्हें कुछ धार्मिक अनुष्ठानों और आध्यात्मिक परंपराओं में अर्पित किया जाता है। साधुओं को पुष्प अर्पित करना सम्मान, श्रद्धा और आध्यात्मिक समर्पण का प्रतीक माना जाता है।

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