
राहु-गुरु युति से उत्पन्न चांडाल दोष के अशुभ प्रभाव को कम करने एवं बुद्धि व सफलता प्राप्ति हेतु विशेष वैदिक अनुष्ठान।
जब जन्म कुंडली में राहु और गुरु की युति होती है तो चांडाल दोष बनता है। यह दोष बुद्धि, निर्णय क्षमता, मान-सम्मान और आध्यात्मिक उन्नति में बाधा उत्पन्न करता है। यह पूजा चांडाल दोष के अशुभ प्रभाव को शांत करने, मानसिक भ्रम दूर करने और जीवन में सकारात्मकता व सफलता लाने हेतु की जाती है। इसमें वैदिक मंत्र जाप, राहु-गुरु शांति पाठ, हवन एवं साधक के नाम से संकल्प शामिल है। कृपया ध्यान दें: यह पूजा केवल तभी संपन्न की जाएगी जब न्यूनतम 10 बुकिंग प्राप्त हो जाएंगी।
यह पूजा जन्म कुंडली में चांडाल दोष के दुष्प्रभाव को कम कर जीवन में स्थिरता और स्पष्ट निर्णय क्षमता प्रदान करती है।
गुरु ग्रह के शुभ प्रभाव को बढ़ाकर भ्रम, गलत निर्णय और मानसिक अस्थिरता को कम करता है।
यह अनुष्ठान करियर में उन्नति, मान-सम्मान की पुनः प्राप्ति और आर्थिक बाधाओं को दूर करने में सहायक है।
बुकिंग के बाद, चयनित तिथि और समय पर आपकी पूजा संपन्न की जाती है और आपको इसे लाइव देखने की सुविधा प्रदान की जाती है। पूजा के दौरान पंडित जी आपका नाम और गोत्र उच्चारण कर संकल्प लेते हैं, जिससे संपूर्ण विधि-विधान विशेष रूप से आपके लिए संपन्न किया जाता है। आप पूरी पूजा को लाइव अनुभव कर सकते हैं और उसका सीधा आशीर्वाद प्राप्त कर सकते हैं।
अनुष्ठान की शुरुआत साधक के नाम से संकल्प लेकर तथा जन्म विवरण के आधार पर चांडाल दोष शांति हेतु विशेष आह्वान से की जाती है।
राहु और गुरु ग्रह की शांति हेतु वैदिक मंत्रों का जाप किया जाता है जिससे अशुभ प्रभाव कम होकर संतुलन और सद्बुद्धि प्राप्त हो।
विशेष सामग्री से हवन किया जाता है जिससे दोष के प्रभाव शांत हों, तत्पश्चात पूर्णाहुति देकर अनुष्ठान की सिद्धि एवं आशीर्वाद प्राप्त किया जाता है।
काले तिल एक पवित्र चढ़ावा माने जाते हैं जिन्हें कई हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों और आध्यात्मिक परंपराओं में अर्पित किया जाता है। यह शुद्धता, सुरक्षा और श्रद्धा का प्रतीक है। साधुओं को काले तिल अर्पित करना आशीर्वाद और पुण्य प्राप्त करने का माध्यम माना जाता है।
काले कपड़े एक पवित्र चढ़ावा है जिसे धार्मिक अनुष्ठानों और आध्यात्मिक परंपराओं में दान किया जाता है। साधुओं को वस्त्र अर्पित करना सम्मान, सेवा और दान का प्रतीक माना जाता है। यह चढ़ावा साधुओं की दैनिक आवश्यकताओं में सहायता करता है और इसे श्रद्धा व पुण्य का कार्य माना जाता है।
तांबे का लोटा एक पारंपरिक और पवित्र पात्र है जिसका उपयोग कई हिंदू धार्मिक अनुष्ठानों और पूजा में किया जाता है। इसका प्रयोग पवित्र जल रखने और अर्पित करने के लिए किया जाता है। साधुओं को तांबे का लोटा अर्पित करना श्रद्धा, पवित्रता और सम्मान का प्रतीक माना जाता है।

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